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शिशॠको ठोस आहार देने की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ इन चीजों से करें
शिशॠके बड़ा होने पर उसे ठोस आहार देना शà¥à¤°à¥‚ किया जाता है। बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को ठोस आहार में कà¥â€à¤¯à¤¾ चीजें देनी हैं, ये जानना आपके लिठबहà¥à¤¤ जरूरी है।
शिशॠको 6 महीने के होने के बाद ठोस आहार देना शà¥à¤°à¥‚ किया जाता है। बचà¥â€à¤šà¥‡ के लिठखाना à¤à¤•दम नया होता है और उसके पेट को इसे पचाने में समय लग सकता है इसलिठआपको इस बात का बहà¥à¤¤ धà¥â€à¤¯à¤¾à¤¨ रखना पड़ेगा कि ठोस आहार शà¥à¤°à¥‚ करने पर बचà¥â€à¤šà¥‡ को सबसे पहले कà¥â€à¤¯à¤¾ खिलाना चाहिà¤à¥¤
यहां हम आपको कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के बारे में बता रहे हैं जो शिशॠको ठोस आहार शà¥à¤°à¥‚ करने पर जरूर देने चाहिठया इनà¥â€à¤¹à¥€à¤‚ से ठोस आहार की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ करनी चाहिà¤à¥¤
पहली बार बचà¥â€à¤šà¥‡ को कैसे खिलाà¤à¤‚ ठोस आहार
आप बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ मिलà¥â€à¤• और ठोस आहार को मिलाकर बचà¥â€à¤šà¥‡ को दे सकते हैं। इससे उसे à¤à¤• दम से नया बदलाव नहीं लगेगा। पहले हमेशा थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में ही खिलाना चाहिà¤à¥¤ à¤à¤• निवाले में à¤à¤• छोटी चमà¥â€à¤®à¤š से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ न खिलाà¤à¤‚। जब शिशॠको ठोस आहार खाने की आदत हो जाठतब आप उसे दही और सेब आदि मिलाकर खिला सकते हैं।
बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को रोज कितना घी खिलाना चाहिà¤, जानिठफायदे और नà¥à¤•सान के बारे में
यदि घी का सेवन सही मातà¥à¤°à¤¾ में किया जाठतो इससे सà¥â€à¤µà¤¾à¤¸à¥â€à¤¥à¥â€à¤¯ को कई तरह के लाठमिलते हैं। घी में सैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होते हैं जो आसानी से पच जाते हैं।
घी विटामिनों और खनिज पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का बेहतरीन सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है। इससे शिशॠके विकास में बहà¥à¤¤ मदद मिल सकती है। बचà¥â€à¤šà¥‡ को à¤à¤• साल का होने तक नमक नहीं खिलाना चाहिठइसलिठउसके ठोस आहार में सà¥â€à¤µà¤¾à¤¦ और पोषण बढ़ाने के लिठघी डाला जा सकता है।
6 महीने से अधिक उमà¥à¤° के बचà¥â€à¤šà¥‡ के आहार में घी को शामिल कर सकते हैं। दाल और चावल की खिचड़ी में घी की कà¥à¤› बूंदें डालकर इसकी शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ की जा सकती है। आप शिशॠके बढ़ने के साथ-साथ घी की मातà¥à¤°à¤¾ धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं। हालांकि, à¤à¤• दिन में बचà¥â€à¤šà¥‡ को à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ घी नहीं खिलाना चाहिà¤à¥¤
शिशॠके विकास के लिठघी बहà¥à¤¤ लाà¤à¤•ारी होता है। हालांकि, आपको पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में ही घी का सेवन करना है। जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ घी खाने से पाचन संबंधी परेशानियां, à¤à¥‚ख में कमी और मोटापे की शिकायत हो सकती है।
6 महीने के शिशॠको दिन में बार में सिरà¥à¤« आधा चमà¥â€à¤®à¤š घी खिलाना चाहिà¤à¥¤ 8 महीने के शिशॠको दो बार कर के à¤â€à¤• तिहाई से à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š घी, 10 महीने के शिशॠको दिन में तीन बार कर के à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š घी
à¤à¤• साल के बचà¥â€à¤šà¥‡ को दिन में 3 बार कर के à¤à¤• से डेढ़ चमà¥â€à¤®à¤š घी और दो साल के बचà¥â€à¤šà¥‡ को दिन में तीन बार कर के डेढ़ से दो चमà¥â€à¤®à¤š घी खिलाना चाहिà¤à¥¤
à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š घी से 112 किलो कैलोरी à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ मिलती है इसलिठघी शिशॠके लिठà¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ का अचà¥â€à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ हो सकता है। रोज सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में घी खाने से संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रूप से वजन बढ़ता है। घी में कोंजà¥à¤—ेटिड लिनोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होता है जो शिशॠको संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ वजन पाने में मदद करता है।
घी में मौजूद कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ की हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ रखने में मदद करता है। इसमें कई विटामिन और डीà¤à¤šà¤ होते हैं जो आंखों, तà¥â€à¤µà¤šà¤¾ और इमà¥â€à¤¯à¥‚निटी के लिठफायदेमंद माने जाते हैं। बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ और खà¥à¤œà¤²à¥€ का इलाज घी से किया जा सकता है। पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हिसà¥â€à¤¸à¥‡ पर बस हलà¥â€à¤•ा सा घी मल दें। घी के सेवन से बचà¥â€à¤šà¥‡ का पाचन à¤à¥€ ठीक रहता है।
सेब
बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को सेब का मीठा और खटà¥à¤Ÿà¤¾ सà¥â€à¤µà¤¾à¤¦ पसंद आà¤à¤—ा। आप ठोस आहार की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ सेब से कर सकते हैं। वहीं, सेब में फाइबर अधिक और फैट की मातà¥à¤°à¤¾ कम होती है इसलिठयह फल शिशॠके लिठबहà¥à¤¤ लाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• होता है। आप सेब का छिलका उतारकर उसकी पà¥â€à¤¯à¥‚री बनाकर बचà¥â€à¤šà¥‡ को दे सकती हैं।
चà¥à¤•ंदर
चà¥à¤•ंदर को उबालकर खिलाने से शिशॠको अनेक पोषक ततà¥â€à¤µ मिल जाते हैं। चà¥à¤•ंदर में फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होता है जो शिशॠके मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥â€à¤• के विकास में मदद करता है। कई बचà¥â€à¤šà¥‡ बड़े आराम से चà¥à¤•ंदर खा लेते हैं।
बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को रोज कितना घी खिलाना चाहिà¤, जानिठफायदे और नà¥à¤•सान के बारे में
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यदि घी का सेवन सही मातà¥à¤°à¤¾ में किया जाठतो इससे सà¥â€à¤µà¤¾à¤¸à¥â€à¤¥à¥â€à¤¯ को कई तरह के लाठमिलते हैं। घी में सैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होते हैं जो आसानी से पच जाते हैं।
घी विटामिनों और खनिज पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का बेहतरीन सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है। इससे शिशॠके विकास में बहà¥à¤¤ मदद मिल सकती है। बचà¥â€à¤šà¥‡ को à¤à¤• साल का होने तक नमक नहीं खिलाना चाहिठइसलिठउसके ठोस आहार में सà¥â€à¤µà¤¾à¤¦ और पोषण बढ़ाने के लिठघी डाला जा सकता है।
6 महीने से अधिक उमà¥à¤° के बचà¥â€à¤šà¥‡ के आहार में घी को शामिल कर सकते हैं। दाल और चावल की खिचड़ी में घी की कà¥à¤› बूंदें डालकर इसकी शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ की जा सकती है। आप शिशॠके बढ़ने के साथ-साथ घी की मातà¥à¤°à¤¾ धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं। हालांकि, à¤à¤• दिन में बचà¥â€à¤šà¥‡ को à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ घी नहीं खिलाना चाहिà¤à¥¤
शिशॠके विकास के लिठघी बहà¥à¤¤ लाà¤à¤•ारी होता है। हालांकि, आपको पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में ही घी का सेवन करना है। जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ घी खाने से पाचन संबंधी परेशानियां, à¤à¥‚ख में कमी और मोटापे की शिकायत हो सकती है।
6 महीने के शिशॠको दिन में बार में सिरà¥à¤« आधा चमà¥â€à¤®à¤š घी खिलाना चाहिà¤à¥¤ 8 महीने के शिशॠको दो बार कर के à¤â€à¤• तिहाई से à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š घी, 10 महीने के शिशॠको दिन में तीन बार कर के à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š घी
à¤à¤• साल के बचà¥â€à¤šà¥‡ को दिन में 3 बार कर के à¤à¤• से डेढ़ चमà¥â€à¤®à¤š घी और दो साल के बचà¥â€à¤šà¥‡ को दिन में तीन बार कर के डेढ़ से दो चमà¥â€à¤®à¤š घी खिलाना चाहिà¤à¥¤
à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š घी से 112 किलो कैलोरी à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ मिलती है इसलिठघी शिशॠके लिठà¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ का अचà¥â€à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ हो सकता है। रोज सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में घी खाने से संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रूप से वजन बढ़ता है। घी में कोंजà¥à¤—ेटिड लिनोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होता है जो शिशॠको संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ वजन पाने में मदद करता है।
घी में मौजूद कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ की हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ रखने में मदद करता है। इसमें कई विटामिन और डीà¤à¤šà¤ होते हैं जो आंखों, तà¥â€à¤µà¤šà¤¾ और इमà¥â€à¤¯à¥‚निटी के लिठफायदेमंद माने जाते हैं। बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ और खà¥à¤œà¤²à¥€ का इलाज घी से किया जा सकता है। पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हिसà¥â€à¤¸à¥‡ पर बस हलà¥â€à¤•ा सा घी मल दें। घी के सेवन से बचà¥â€à¤šà¥‡ का पाचन à¤à¥€ ठीक रहता है।
नाशपाती
नाशपाती से बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ का पाचन ठीक रहता है। नाशपाती में पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में फासà¥â€à¤«à¥‹à¤°à¤¸ और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® होता है जाे शिशॠकी हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को मजबूत बनाने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को बढ़ावा देता है। नाशपाती का छिलका उतार कर, उसके बीज निकालने के बाद पà¥â€à¤¯à¥‚री के रूप में शिशॠको खिलाà¤à¤‚।
दही
7 से 8 महीने के बचà¥â€à¤šà¥‡ को दही खिला सकते हैं। दही बहà¥à¤¤ नरम होती है इसलिठशà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ ठोस आहार के रूप में दही खिला सकते हैं। ये कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® का अचà¥â€à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ होता है और इससे शिशॠका पाचन à¤à¥€ दà¥à¤°à¥à¤¸à¥â€à¤¤ रहता है।
बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को रोज कितना घी खिलाना चाहिà¤, जानिठफायदे और नà¥à¤•सान के बारे में
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यदि घी का सेवन सही मातà¥à¤°à¤¾ में किया जाठतो इससे सà¥â€à¤µà¤¾à¤¸à¥â€à¤¥à¥â€à¤¯ को कई तरह के लाठमिलते हैं। घी में सैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होते हैं जो आसानी से पच जाते हैं।
घी विटामिनों और खनिज पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का बेहतरीन सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है। इससे शिशॠके विकास में बहà¥à¤¤ मदद मिल सकती है। बचà¥â€à¤šà¥‡ को à¤à¤• साल का होने तक नमक नहीं खिलाना चाहिठइसलिठउसके ठोस आहार में सà¥â€à¤µà¤¾à¤¦ और पोषण बढ़ाने के लिठघी डाला जा सकता है।
6 महीने से अधिक उमà¥à¤° के बचà¥â€à¤šà¥‡ के आहार में घी को शामिल कर सकते हैं। दाल और चावल की खिचड़ी में घी की कà¥à¤› बूंदें डालकर इसकी शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ की जा सकती है। आप शिशॠके बढ़ने के साथ-साथ घी की मातà¥à¤°à¤¾ धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं। हालांकि, à¤à¤• दिन में बचà¥â€à¤šà¥‡ को à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ घी नहीं खिलाना चाहिà¤à¥¤
शिशॠके विकास के लिठघी बहà¥à¤¤ लाà¤à¤•ारी होता है। हालांकि, आपको पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में ही घी का सेवन करना है। जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ घी खाने से पाचन संबंधी परेशानियां, à¤à¥‚ख में कमी और मोटापे की शिकायत हो सकती है।
6 महीने के शिशॠको दिन में बार में सिरà¥à¤« आधा चमà¥â€à¤®à¤š घी खिलाना चाहिà¤à¥¤ 8 महीने के शिशॠको दो बार कर के à¤â€à¤• तिहाई से à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š घी, 10 महीने के शिशॠको दिन में तीन बार कर के à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š घी
à¤à¤• साल के बचà¥â€à¤šà¥‡ को दिन में 3 बार कर के à¤à¤• से डेढ़ चमà¥â€à¤®à¤š घी और दो साल के बचà¥â€à¤šà¥‡ को दिन में तीन बार कर के डेढ़ से दो चमà¥â€à¤®à¤š घी खिलाना चाहिà¤à¥¤
à¤à¤• चमà¥â€à¤®à¤š घी से 112 किलो कैलोरी à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ मिलती है इसलिठघी शिशॠके लिठà¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ का अचà¥â€à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ हो सकता है। रोज सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में घी खाने से संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रूप से वजन बढ़ता है। घी में कोंजà¥à¤—ेटिड लिनोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होता है जो शिशॠको संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ वजन पाने में मदद करता है।
यह à¤à¥€ पढ़ें : बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को बोतल से दूध पिलाने के नà¥à¤•सान
घी में मौजूद कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ की हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ रखने में मदद करता है। इसमें कई विटामिन और डीà¤à¤šà¤ होते हैं जो आंखों, तà¥â€à¤µà¤šà¤¾ और इमà¥â€à¤¯à¥‚निटी के लिठफायदेमंद माने जाते हैं। बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ और खà¥à¤œà¤²à¥€ का इलाज घी से किया जा सकता है। पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हिसà¥â€à¤¸à¥‡ पर बस हलà¥â€à¤•ा सा घी मल दें। घी के सेवन से बचà¥â€à¤šà¥‡ का पाचन à¤à¥€ ठीक रहता है।
केला और शकरकंद
बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ के लिठकेला सà¥à¤ªà¤°à¤«à¥‚ड का काम करता है। इसमें फोलेट की उचà¥â€à¤š मातà¥à¤°à¤¾ होती है जो बचà¥â€à¤šà¥‡ के दिमाग को à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ रखने में मदद करता है। इसके अलावा शिशॠको ठोस आहार की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ शकरकंद से à¤à¥€ करवाई जा सकती है। इसमें बीटा-कैरोटीन होता है जो आंखों को तेज करता है और इमà¥â€à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ बढ़ाता है।
ठोस आहार देने में इन बातों का रखें धà¥â€à¤¯à¤¾à¤¨
बचà¥â€à¤šà¥‡ आसानी से खाना नहीं खाते हैं। आपको उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ खेल-खेल में खाना खिलाना पड़ता है।
ठोस आहार शà¥à¤°à¥‚ करने से पहले बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ मिलà¥â€à¤• या फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥â€à¤• को चमà¥â€à¤®à¤š और कटोरी से पिलाना शà¥à¤°à¥‚ करें।
बचà¥â€à¤šà¥‡ के खाने में चीनी और नमक का इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² न या कम करें।
खाना जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गरà¥à¤® या ठंडा नहीं होना चाहिà¤à¥¤ बचà¥â€à¤šà¥‡ को खिलाने से पहले खाने का तापमान चैक जरूर कर लें।
शिशॠके बीमार या खराब मूड में होने पर ठोस आहार देने से बचें। इससे हो सकता है कि उनमें ठोस आहार के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गलत धारण बन जाà¤à¥¤
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